समाधानित होने से जीवन में नित्य उत्सव है। समाधान का अर्थ है क्यों जीना ?और कैसे जीना? का उत्तर पता होना। ए.नागराज जी द्वारा प्रतिपादित मध्यस्थ दर्शन सह अस्तित्ववाद पुस्तक का अध्ययन से समझ में आता है। कि क्यों जीना= निरंतर सुखी होने के लिए जीना। और कैसे जीना=न्याय (उभयतृप्ति) पूर्वक जीना। इस प्रकार यदि समझ से जीना होता है, तो जीवन में नित्य उत्सव है। इससे भिन्न स्थिति जिंदा रहना कहलाता है, जीना नहीं।